हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा, 4 जून। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पालीवाल पार्क के प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने प्रकृति द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने वाले बीजों तथा स्वाभाविक रूप से उगने वाले पौधों (नेचुरल रीजेनेरेशन) के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि हरियाली बढ़ाने के लिए प्रकृति के इन अमूल्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर भ्रमणकर्ताओं ने पार्क में स्थित दुर्लभ अंकोल (अलांगियम साल्वीफोलियम) वृक्ष के बीज एकत्रित किए। उपस्थित सदस्यों ने इन बीजों को अंकुरित कर पौधे तैयार करने, उनका संरक्षण करने तथा बड़े होने तक उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वृक्षों के नीचे स्वाभाविक रूप से उगने वाले छोटे पौधों को अक्सर खरपतवार समझकर नष्ट कर दिया जाता है, जबकि यही पौधे भविष्य में विशाल वृक्ष बन सकते हैं। ऐसे पौधों को सुरक्षित स्थानों पर प्रतिरोपित कर उनका संरक्षण किया जाना चाहिए। विशेष रूप से पीपल, गूलर, पाखड़ और बरगद जैसे देशी वृक्षों के स्वाभाविक रूप से उगे पौधों को बचाने और विकसित करने पर जोर दिया गया।
प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास उपलब्ध बीजों और स्वाभाविक रूप से उगे पौधों के संरक्षण का छोटा-सा प्रयास करे, तो बिना किसी बड़े खर्च के लाखों नए वृक्ष तैयार किए जा सकते हैं। हरियाली बढ़ाने के लिए बीज और पौधे प्रकृति का सबसे मूल्यवान एवं निःशुल्क उपहार हैं।
इस अवसर पर के.सी. जैन, किशोर जैन, अनिल अग्रवाल सहित अन्य प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने बीज संग्रह, पौध संवर्धन और वृक्ष संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया तथा अधिकाधिक लोगों से इससे जुड़ने का आह्वान किया।
“एक बीज - एक वृक्ष - एक हरित भविष्य” का संदेश देते हुए उपस्थित सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

