हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में आयोजित श्रीगणेश पुराण प्रवचन श्रृंखला के पांचवें दिन कथावाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने काशी के ढुंढिराज विनायक के महत्व का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक प्राणी की क्षमता के अनुरूप कार्य निर्धारित कर उसे उसी मार्ग पर अग्रसर करते हैं, इसलिए उनका यह स्वरूप 'ढुंढिराज विनायक' कहलाता है।
प्रवचन में काशी के विभिन्न विनायक स्वरूपों, भगवान शिव के मंदराचल गमन, राजा दिवोदास के धर्मपरायण शासन तथा काशी में असंख्य शिवलिंगों की स्थापना की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव द्वारा भेजे गए देवी-देवता भी काशी की महिमा से प्रभावित होकर वहीं शिवलिंग स्थापित कर विराजमान हो गए। कथा के अंत में माता गौरी के तप, भगवान गणेश के जन्म तथा त्रेतायुग में उनके अवतार का प्रसंग भी सुनाया गया।
इस अवसर पर आर.के. मेहता, कैप्टन बिशन सिंह, देवेंद्र गोयल, अनुज गुप्ता, डॉ. राजीव शर्मा, वीना कालरा, सरिता गौतम, सारिका कालरा, नीलम गुप्ता सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

