‘मैं गर्व से मोची हूं’ कहकर बटोरीं सुर्खियां,एआई युग में कौशल,नवाचार और उद्योग-शिक्षा साझेदारी पर दिया जोर
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। डावर ग्रुप के चेयरमैन एवं डेवलपमेंट काउंसिल फॉर फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री के चेयरमैन पूरन डावर ने प्रधानमंत्री के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत–ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम के उच्चस्तरीय बिजनेस डेलिगेशन में भारत और आगरा का प्रतिनिधित्व करते हुए भविष्य की शिक्षा,कौशल विकास और उद्योग की दिशा पर प्रभावशाली विचार रखे।
“Education for the Future Economy” विषय पर अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने स्वयं को गर्व से “मोची (Shoemaker)” बताते हुए की। उन्होंने कहा कि जूते मानव जीवन के “टायर और शॉक एब्जॉर्बर” हैं तथा पारंपरिक कारीगरों का माना जाने वाला फुटवियर उद्योग आज भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है।
डावर ने बताया कि भारत का फुटवियर एवं लेदर उद्योग वर्तमान में लगभग 26 अरब अमेरिकी डॉलर का है और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) तथा वैश्विक साझेदारियों के बल पर जल्द ही 50 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई के दौर में केवल जानकारी याद रखना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा को अब अनुकूलन क्षमता, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान, संवाद कौशल और नेतृत्व विकसित करने पर केंद्रित होना होगा। उनके अनुसार अनुकूलन क्षमता (Adaptability) भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण योग्यता है।
उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत समन्वय की वकालत करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को फैक्ट्रियों, डिजाइन सेंटरों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, लॉजिस्टिक्स पार्कों और इनोवेशन हब में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान, विनिर्माण, स्टार्टअप और इनक्यूबेशन को एक ही परिसर में विकसित करने के लिए “इंटीग्रेटेड लर्निंग कॉम्प्लेक्स” की अवधारणा भी प्रस्तुत की।
डावर ने कहा कि भारत की युवा शक्ति, विनिर्माण क्षमता और उद्यमशीलता तथा ऑस्ट्रेलिया की विश्वस्तरीय शिक्षा, अनुसंधान और तकनीक मिलकर भविष्य की वैश्विक कार्यशक्ति तैयार कर सकती हैं। उन्होंने उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान, कौशल प्रमाणन,स्टार्टअप इकोसिस्टम और एआई साझेदारी को दोनों देशों के सहयोग का नया आधार बताया।
उन्होंने अपने संबोधन का समापन इस संदेश के साथ किया कि भविष्य केवल बुद्धिमान मशीनों का नहीं, बल्कि उन लोगों का होगा जो मशीनों के साथ मिलकर नवाचार करना जानते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका यह उद्बोधन भारत की नई शिक्षा नीति, कौशल विकास और विनिर्माण क्षमता की प्रभावी प्रस्तुति के साथ-साथ आगरा के उद्योग जगत के लिए भी गौरव का विषय बना।


