हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में दयालबाग में आयोजित श्रीगणेश पुराण प्रवचन के छठे दिन कथावाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने भगवान गणेश के मयूरेश्वर स्वरूप, गणेश कवच और दिव्य अस्त्रों की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश बचपन से ही सृष्टि के कल्याण के कार्यों में जुट गए थे। पालने में रहते हुए भी उन्होंने अनेक असुरों का संहार किया। माता पार्वती की चिंता दूर करने के लिए ऋषि मरीचि द्वारा धारण कराया गया गणेश कवच आज भी श्रद्धालुओं के लिए रक्षा और मंगल का अचूक साधन है।
उन्होंने बताया कि देव शिल्पी विश्वकर्मा ने बालक गणेश को परशु, परिघ, पाश और पद्म जैसे दिव्य एवं अमोघ अस्त्र प्रदान किए थे। माता कद्रू और विनता के विवाद का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि इसी घटना से मयूर के जन्म की भूमिका बनी और भगवान गणेश ने उसे अपना वाहन स्वीकार कर 'मयूरेश्वर' नाम धारण किया। जलक्रीड़ा के दौरान भगवान गणेश ने वासुकि और शेषनाग को वश में कर पक्षियों को बंधन से मुक्त कराया तथा बाद में विवाह के बहाने गंडकी नगर की ओर प्रस्थान किया।
फाउंडेशन के निदेशक रवि शर्मा ने बताया कि सोमवार को कथा का पूर्ण विश्राम रहेगा, जबकि मंगलवार को भगवान श्री गणेश का मोदक सहस्त्रार्चन आयोजित होगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सहस्त्रार्चन का पुण्य लाभ लेने का आग्रह किया।
इस अवसर पर कैप्टन बिशन सिंह, देवेन्द्र गोयल, आर.के. मेहता, वीरकिशोर गुप्ता, विवेक गौड़, राधा शर्मा, कुसुम गौड़, अनुज गुप्ता, वीना कालरा, सरिता गौतम, सारिका कालरा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

