हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा,06 जुलाई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय ठाकुर हरी गोपाल सिंह चौहान की धर्मपत्नी एवं 96 वर्षीय वयोवृद्ध माताश्री वीरेश्वरी देवी ने अपनी अंतिम इच्छा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का एक अनुकरणीय संदेश समाज को दिया है।
गत 28 जून को 96 वर्ष की आयु पूर्ण कर पंचतत्वों में विलीन हुईं माताश्री वीरेश्वरी देवी ने अपने जीवनकाल में ही परिजनों से संकल्प लिया था कि उनकी अंत्येष्टि पूर्णतः वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न की जाए तथा पारंपरिक अस्थि-विसर्जन के स्थान पर पर्यावरण-अनुकूल पद्धति अपनाई जाए।
माताश्री का स्पष्ट मानना था कि परमात्मा न्यायकारी हैं तथा मनुष्य की मुक्ति अथवा पुनर्जन्म का आधार उसके कर्म होते हैं, न कि गंगा अथवा अन्य नदियों में अस्थियों का विसर्जन। उनका कहना था कि नदियों में अस्थियों का प्रवाह जल प्रदूषण को बढ़ावा देता है, जिससे जलचर एवं अन्य जीव-जंतुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी कारण उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में निर्देश दिया था कि उनकी अस्थियों को किसी नदी में प्रवाहित करने के बजाय गांव के खेत में विधिवत रूप से भूमि में स्थापित किया जाए तथा उस स्थान पर एक वृक्ष लगाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी इच्छा व्यक्त की थी कि चिता की राख को श्मशान में छोड़ने के बजाय खेतों में बिखेर दिया जाए।
उनका विश्वास था कि मानव शरीर के अवशेष प्राकृतिक रूप से मिट्टी में विलीन होकर वृक्षों के लिए पोषक तत्व का कार्य करते हैं और भविष्य में वही वृक्ष समाज को छाया, ऑक्सीजन तथा पर्यावरण संरक्षण का अमूल्य योगदान प्रदान करता है।
माताश्री वीरेश्वरी देवी ने अपने विचारों के समर्थन में शिव स्मृति के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए यह भी कहा था कि शव एवं अस्थियों को नदियों में प्रवाहित करना शास्त्रीय दृष्टि से भी त्याज्य माना गया है।
उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने ग्राम चौकड़ा में गुरुकुल के आचार्यों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार एवं यज्ञ के पश्चात खेत में अस्थियों का विधिवत विसर्जन किया तथा वहां वृक्षारोपण कर उनकी पर्यावरण चेतना को साकार रूप दिया। यह अनूठी पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय उदाहरण के रूप में देखी जा रही।
इस अवसर पर उनके पुत्र ठाकुर विजय पाल सिंह चौहान एडवोकेट, ग्रुप कैप्टन डॉ कुँवर जय पाल सिंह चौहान, कमांडेंट बीएसएफ़ कुंवर यश पाल सिंह चौहान, वरिष्ठ चिकित्सक प्रोफेसर डॉ कुँवर सोमेंद्र पाल सिंह चौहान, कुँवर हरेंद्र सिंह चौहान महाप्रबंधक डी एच क्रियेशनस् के साथ मान सिंह परमार, एस पी सिंह, बृजराज सिंह, आगरा बार के अध्यक्ष सुभाष बाबू परमार, संजय राघव, गजेन्द्र चौहान, गुरुकुल जस्सा के अधिष्ठाता आचार्य दुष्यंत, पुरोहित सभा के अध्यक्ष ओमप्रकाश शास्त्री, के जी एस चौहान, एस पी सिंह, मिथिलेश कुमारी, संतोष परमार, मधु परमार, गायत्री परमार, सुलक्षणा कुमारी, सुभाषिणी सैंगर,ज्योत्सना सैंगर आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
रिपोर्ट : असलम सलीमी


