अमर शहीद पं. राम प्रसाद 'बिस्मिल' जी की जयंती (11 जून) पर शत-शत नमन.🙏

हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️  धर्मेन्द्र कुमार चौधरी

"मुलाजिम हमको मत कहिए,बड़ा अफसोस होता है,

अदालत के अदब से यहाँ तशरीफ लाए हैं।

पलट देते हैं हम मौजे-हवादिस अपनी जुर्रत से,

कि हमने आंधियों में भी चिराग अक्सर जलाए हैं।"

काकोरी कांड में गिरफ्तारी के बाद अदालत में सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश ने क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' को "मुजरिम" के स्थान पर "मुलाजिम" कहकर संबोधित किया, तब उन्होंने निर्भीकता और स्वाभिमान के साथ उपर्युक्त पंक्तियाँ सुनाकर यह स्पष्ट कर दिया कि देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी किसी सत्ता के सेवक नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता के प्रहरी होते हैं।

मात्र 30 वर्ष की अल्पायु में मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूम लेने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और शत-शत नमन।🙏

"जो क़त्ल को भी जश्न लिखे, मौत को माशूक,

'बिस्मिल' को बराबर हैं कलम हो कि हो बन्दूक।"

पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' और अशफाक उल्ला खाँ की मित्रता भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रभक्ति की अद्भुत मिसाल है। जनश्रुति के अनुसार,फाँसी से कुछ दिन पूर्व जब बिस्मिल ने अशफाक उल्ला खाँ की आँखों में आँसू देखे तो उन्होंने पूछा, "क्या तुम्हें फाँसी का भय है ?" इस पर अशफाक ने उत्तर दिया, "भय नहीं मित्र, मैं तो यह सोचकर भावुक हूँ कि शीघ्र ही हमें फाँसी हो जाएगी। तुम्हारे धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है, इसलिए तुम इस देश की सेवा के लिए पुनः जन्म ले सकते हो,जबकि मेरे धर्म में ऐसा उल्लेख नहीं है।"

यह प्रसंग भले ही ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित न हो,किंतु यह दोनों क्रांतिकारियों के बीच अटूट विश्वास, त्याग और राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त करता है। आज भी बिस्मिल और अशफाक की जोड़ी देशवासियों को यह संदेश देती है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसकी रक्षा के लिए जाति, धर्म तथा व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठना ही सच्ची देशभक्ति है।

अमर शहीद राम प्रसाद 'बिस्मिल' ने न केवल अपने प्राणों का बलिदान देकर स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा प्रदान की, बल्कि अपनी लेखनी और ओजस्वी रचनाओं के माध्यम से असंख्य युवाओं के हृदय में देशभक्ति की ज्योति प्रज्वलित की। उनके शब्द आज भी नई पीढ़ी को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने और उच्च आदर्शों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं।

पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' की जयंती पर समस्त राष्ट्र कृतज्ञ भाव से उन्हें स्मरण करता है और उनके अदम्य साहस,बलिदान तथा राष्ट्रनिष्ठा को नमन करता है।

"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,

देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए-क़ातिल में है।"

अमर शहीद पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। 🙏..उनके आदर्श सदैव राष्ट्र को दिशा देते रहेंगे।

जय हिन्द..🙏

( लेखक-उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव हैं )