गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व जांच, 47 स्वास्थ्य केंद्रों पर मनाया गया पीएमएसएमए दिवस


उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों को चिन्हित कर किया गया संदर्भित

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा, 09 जून। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस के अंतर्गत मंगलवार को जनपद की 47 स्वास्थ्य इकाइयों पर गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। इस दौरान गर्भवतियों को आवश्यक परामर्श देने के साथ आयरन एवं कैल्शियम की गोलियों का भी वितरण किया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि पीएमएसएमए का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यापक प्रसवपूर्व सेवाएं उपलब्ध कराकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक गंभीर समस्या है, इसलिए गर्भवतियों की कम से कम चार बार हीमोग्लोबिन जांच कराना आवश्यक है। उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं से प्रत्येक माह आयोजित होने वाले पीएमएसएमए दिवस पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर अपनी नियमित जांच कराने की अपील की।

डिप्टी सीएमओ (आरसीएच) डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक कुल 1,29,478 गर्भवतियों ने पीएमएसएमए दिवस पर प्रसवपूर्व जांच कराई, जिनमें 14,944 उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों के लिए संदर्भित किया गया। वहीं, एक अप्रैल 2026 से एक जून 2026 तक 13,476 गर्भवतियों की जांच की गई, जिनमें 1,805 उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों को चिन्हित कर आवश्यक उपचार हेतु संदर्भित किया गया।

जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता संगीता भारती ने बताया कि पीएमएसएमए दिवस के दौरान गर्भवतियों का टीकाकरण, यूरिन जांच, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, सिफिलिस, हेपेटाइटिस-बी, एचआईवी, टीबी, ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्रुप, सीबीसी, वजन और पेट की जांच की गई। आवश्यकता अनुसार अल्ट्रासाउंड एवं आयरन सुक्रोज की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही, दंपतियों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों की जानकारी देकर उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जीवनीमंडी की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ.मेघना शर्मा ने बताया कि केंद्र पर 52 गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच की गई, जिनमें सात उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों को चिन्हित कर संदर्भित किया गया। वहीं, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दहतोरा मोड़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीक्षा गौतम के अनुसार केंद्र पर 16 गर्भवतियों की जांच की गई, जिनमें दो उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर उन्हें आगे की चिकित्सा देखभाल के लिए भेजा गया।

दहतोरा मोड़ क्षेत्र की निवासी छह माह की गर्भवती अफसाना ने बताया कि जांच के दौरान उनकी सभी रिपोर्ट सामान्य पाई गईं। चिकित्सकों ने उन्हें नियमित रूप से आयरन एवं कैल्शियम की गोलियां लेने, पौष्टिक आहार का सेवन करने,पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दी। साथ ही संस्थागत प्रसव के महत्व और उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी भी दी गई।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक गर्भवती महिला का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी जटिलता की समय रहते पहचान कर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।