संघ को समझना है तो संघ की शाखा में आना ही पड़ेगा : महेंद्र जी


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परखम स्थित दीनदयाल उपाध्याय गौ विज्ञान अनुसंधान केन्द्र में 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का समापन

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परखम स्थित दीनदयाल उपाध्याय गौ विज्ञान अनुसंधान केन्द्र में पिछले 15 दिनों से संचालित संघ शिक्षा वर्ग का समापन प्रकट समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर ब्रज प्रांत के विभिन्न जिलों से आए 146 स्वयंसेवक शिक्षार्थियों ने अपने प्रशिक्षण का प्रदर्शन किया।

समापन समारोह में शिक्षार्थियों ने योग, व्यायाम, आसन, दण्ड, नियुद्ध तथा दण्ड प्रहार जैसी विभिन्न शारीरिक विधाओं का सामूहिक प्रदर्शन किया। घोष की ध्वनि के साथ परम पवित्र भगवा ध्वज का आरोहण किया गया। स्वयंसेवकों के अनुशासित प्रदर्शन और सामूहिक कौशल ने उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया।

संघ शिक्षा वर्ग में शिक्षार्थियों को शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ बौद्धिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इसमें प्रातःकालीन दिनचर्या, एकात्मता स्तोत्र, अमृत वचन तथा शाखा में प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना के माध्यम से राष्ट्र सेवा और अनुशासित जीवन के संस्कार विकसित किए गए। घर-परिवार से दूर रहकर सामूहिक एवं अनुशासित जीवन जीने का अभ्यास भी शिक्षार्थियों ने प्राप्त किया।

प्रकट समारोह में मंचासीन अतिथियों में वृंदावन जिले के जिला संघ चालक दास बिहारी, वर्ग सर्वाधिकारी राजकुमार जी, सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मनोज के.एस. यादव तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने कहा कि संघ को समझने के लिए संघ की शाखा में आना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुड़ और चीनी दोनों का स्वाद मीठा होता है, लेकिन बिना चखे उनके अंतर को नहीं समझा जा सकता। ठीक उसी प्रकार संघ को समझने के लिए उसकी कार्यपद्धति को प्रत्यक्ष रूप से जानना होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर के लगभग 96 हजार स्थानों पर संघ का कार्य चल रहा है, लेकिन अभी भी देश के प्रत्येक गांव तक पहुंचने के लिए अधिक कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नियमित साधना और समर्पण से संघ का कार्य निरंतर आगे बढ़ रहा है, किंतु इसकी गति को और बढ़ाने की आवश्यकता है।

महेंद्र जी ने कहा कि संघ अपने 100 वर्षों की यात्रा के बाद भी युवा और सक्रिय है, क्योंकि उसका कार्य "नित नूतन, चिर पुरातन" की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म को किसी एक पूजा पद्धति में सीमित नहीं किया जा सकता और भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी सनातन परंपराओं में निहित है।

उन्होंने पंच परिवर्तन विषय पर बोलते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, पॉलीथिन के प्रयोग से बचने, मातृभाषा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को अपनाने का आह्वान किया। नागरिक कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्र की संपत्ति के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की बात कही। सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर समन्वय और सद्भाव के साथ कार्य करने का संदेश दिया।

मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मनोज के.एस. यादव ने कहा कि संघ के कार्यक्रम में उपस्थित होकर उन्हें गर्व का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने देश में अनुशासन, राष्ट्र सेवा और सामाजिक दायित्व की भावना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने सेना और संघ के बीच अनुशासन, दृढ़ता और राष्ट्र समर्पण जैसी समानताओं पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, मातृशक्ति एवं संत समाज की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से स्वामी देव स्वरूपानंद जी, जगत गुरु भैया दास जी महाराज, आचार्य शैल बिहारी दास जी महाराज, विज्ञानाचार्य जी महाराज, आचार्य अनुराग दास जी महाराज, कृष्णानंद जी महाराज तथा ब्रज रसिक बिहारी दास जी महाराज उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वर्ग पालक महावीर जी, प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी, संस्कृत भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारी बांके लाल गौड़ जी, प्रांत प्रचार प्रमुख कीर्ति जी, प्रांत प्रचार प्रमुख प्रीतम जी, प्रांत बौद्धिक प्रमुख नरेंद्र जी, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, मंत्री हरिशंकर जी, विधायक पूरन प्रकाश, ठाकुर कारिंदा सिंह, विभाग प्रचारक पारस पार्थ जी, विभाग कार्यवाह छैल बिहारी जी, डॉ. संजय जी, विभाग प्रचार प्रमुख एवं समापन कार्यक्रम प्रमुख डॉ. कमल कौशिक जी, अरुण दीक्षित जी, कुश अवतार जी, कुश चाहर जी, ब्रजेश जी, शिवकुमार जी, राम पाठक जी तथा अजय अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य  उपस्थित रहे।