श्रीगणेश पुराण कथा के चौथे दिन प्रकृति संरक्षण का संदेश, शमी और मंदार वृक्ष के धार्मिक महत्व का किया वर्णन
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में आयोजित श्रीगणेश पुराण प्रवचन श्रृंखला के चौथे दिन कथावाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने भगवान गणेश के काशीवास के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान विनायक को भगवान शिव की नगरी काशी सर्वाधिक प्रिय है। उन्होंने कहा कि काशी आगमन के बाद भगवान गणेश विभिन्न स्वरूपों में वहीं विराजमान होते गए और आज भी काशी में उनके प्रत्येक विग्रह में साक्षात दिव्य उपस्थिति का अनुभव किया जाता है।
प्रवचन के दौरान डॉ. उपाध्याय ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए बताया कि दूर्वा से प्रसन्न होने वाले भगवान गणपति मंदार पौधे में साक्षात निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि शमी वृक्ष की पत्तियों से अर्चन करने पर भी भगवान गणेश उसी प्रकार प्रसन्न होते हैं, जैसे दूर्वा अर्पित करने से। उन्होंने शमी और मंदार वृक्ष की उत्पत्ति की कथा सुनाते हुए इनके संरक्षण का आह्वान किया तथा इनके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने नर्मदा तट पर स्थित सुमुख विनायक की कथा सुनाई और बताया कि यज्ञ में गणेश पूजन की उपेक्षा करने के कारण देवताओं को भी जलरूप धारण करना पड़ा। ढुण्ढिराज एवं एकपाद विनायक की महिमा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा के दौरान काशी विश्वनाथ के भजनों और कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
इस अवसर पर देवेंद्र गोयल, कैप्टन बिशन सिंह, आर.के. मेहता, वीरकिशोर गुप्ता, बी.के. गौतम, अनुज गुप्ता, वीना कालरा, सरिता गौतम, सारिका कालरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

