श्री गणेश पुराण प्रवचन श्रृंखला के तीसरे दिन महोत्कट अवतार, दूर्वा अर्पण की परंपरा और कार्तिकेय जन्म प्रसंग का हुआ वर्णन
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में आयोजित श्री गणेश पुराण प्रवचन श्रृंखला के तीसरे दिन कथावाचक डॉ.दीपिका उपाध्याय ने भगवान गणेश के विभिन्न युगों में हुए अवतारों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान विनायक भक्तों के कल्याण और धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक युग में अलग-अलग स्वरूप धारण करते हैं। उन्होंने बताया कि सतयुग में भगवान गणेश महोत्कट, त्रेतायुग में मयूरेश्वर, द्वापर में गजानन तथा कलियुग में धूम्रकेतु रूप में अवतरित होकर भक्तों का उद्धार करते हैं।
प्रवचन के दौरान डॉ.उपाध्याय ने भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा का भी महत्व बताया। उन्होंने कहा कि अनलासुर द्वारा फैलाए गए अग्निकांड से सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान गणेश ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था,जिससे उनके कंठ में तीव्र दाह उत्पन्न हो गया। तब ऋषि-मुनियों ने उनके मस्तक पर 21 दूर्वांकुर अर्पित किए,जिनकी शीतलता से उन्हें राहत मिली। तभी से भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई।
कथावाचक ने देवसेनापति भगवान कार्तिकेय के अवतरण का प्रसंग भी सुनाया तथा महोत्कट अवतार की भूमिका बताते हुए कहा कि देवांतक और नरांतक के अत्याचारों से सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान गणेश ने ऋषि कश्यप और माता अदिति के यहां महोत्कट रूप में अवतार लेकर अनेक दैत्यों का संहार किया।
प्रवचन श्रृंखला का समापन 14 जुलाई को मोदक सहस्त्रार्चन के साथ होगा। इस अवसर पर कैप्टन विशन सिंह, देवेंद्र गोयल, आर.के. मेहता, वीर किशोर गुप्ता, कान्ता शर्मा, सरिता गौतम, सारिका कालरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

